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आईआईटी बाबा अभय सिंह की प्रेरणादायक यात्रा: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से आध्यात्मिकता तक

जानें अभय सिंह की प्रेरणादायक यात्रा, जिन्हें 'आईआईटी बाबा' के नाम से जाना जाता है। कैसे एक आईआईटी बॉम्बे के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग ग्रेजुएट ने एक आकर्

अभय सिंह, जिन्हें "आईआईटी बाबा" के नाम से जाना जाता है, एक पूर्व एयरोस्पेस इंजीनियर और आईआईटी बॉम्बे स्नातक हैं, जिन्होंने एक सफल कॉर्पोरेट करियर से लेकर आध्यात्मिकता को अपनाने तक की अपनी अपरंपरागत यात्रा के लिए व्यापक ध्यान आकर्षित किया। खोज परिणामों के आधार पर उनके जीवन और यात्रा का विस्तृत विवरण यहां दिया गया है

अभय सिंह: आईआईटी ग्रेजुएट से आध्यात्मिक नेता बनने की अद्भुत यात्रा

अभय सिंह, जिन्हें आईआईटी बाबा के नाम से जाना जाता है, एक ऐसी प्रेरणादायक शख्सियत हैं जिनकी कहानी कई लोगों के दिलों को छू जाती है। 3 मार्च 1990 को झज्जर, हरियाणा के सासरौली गांव में जन्मे अभय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में प्राप्त की और इसके बाद दिल्ली में अपनी पढ़ाई की। फिर उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। उनकी शिक्षा और तकनीकी के प्रति प्रेम स्पष्ट था, लेकिन उनका असली सफर तो अब शुरू होने वाला था।

आईआईटी बॉम्बे से लेकर कॉर्पोरेट सफलता तक


अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, अभय सिंह ने कनाडा में काम करना शुरू किया, जहाँ उन्होंने प्रमुख कंपनियों में काम किया। ₹36 लाख प्रति वर्ष की आकर्षक सैलरी के साथ उन्होंने व्यावसायिक सफलता प्राप्त की। हालांकि, इन सभी भौतिक उपलब्धियों के बावजूद, अभय को अंदर से एक खालीपन और अवसाद का सामना करना पड़ा। यही कारण था कि उन्होंने जीवन के अधिक सार्थक उद्देश्य की खोज शुरू की।

आध्यात्मिकता की ओर कदम


2019 में, अभय ने अपना कॉर्पोरेट करियर छोड़ने का फैसला किया और भारत लौट आए। उन्होंने मनाली, शिमला और हरिद्वार जैसे आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा की, जहां उन्होंने ध्यान और आध्यात्मिक प्रथाओं में खुद को समर्पित कर दिया। उनकी यह यात्रा उन्हें श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा जैसे प्रमुख आध्यात्मिक संगठन से जोड़ी, जहाँ उन्होंने साधु जीवन की ओर कदम बढ़ाया।

महाकुंभ मेला 2025 में आईआईटी बाबा की उपस्थिति


अभय सिंह की आध्यात्मिक यात्रा 2025 के महाकुंभ मेला में पूरी दुनिया के सामने आई। उनके आईआईटी में प्राप्त उच्च शिक्षा और आध्यात्मिक परिवर्तन ने उन्हें आईआईटी बाबा के नाम से प्रसिद्ध कर दिया। हालांकि, महाकुंभ के दौरान, अभय ने जूना अखाड़े के आश्रम से बाहर जाने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्हें वहां के अत्यधिक भीड़-भाड़ और कुछ व्यक्तिगत कारणों की वजह से यह कदम उठाना पड़ा।

परिवार की प्रतिक्रिया: एक संतुलित दृष्टिकोण


अभय के पिता, करण ग्रेवाल, जो झज्जर कोर्ट में वकील हैं, अपने बेटे की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं। हालांकि, वे चाहते हैं कि अभय घर लौटे, लेकिन वे उसे अपने मार्ग पर खुश और संतुष्ट देखने की उम्मीद करते हैं, चाहे वह कहीं भी हो।

निष्कर्ष: सच्ची संतुष्टि की ओर एक यात्रा


अभय सिंह की यात्रा यह साबित करती है कि वास्तविक सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं आती, बल्कि आंतरिक शांति और उद्देश्य की प्राप्ति से होती है। उनका यह परिवर्तन हमें यह सिखाता है कि जीवन में सच्ची संतुष्टि आत्म-प्रकाशन और आध्यात्मिक उन्नति से मिलती है, न कि बाहरी पहचान और पुरस्कारों से।






About the author

Chand Ali
Hello! I'm Chand, a passionate blogger since 2019. With a strong background in writing, I’ve developed a deep understanding of creating engaging and informative content. Over the years, I've honed my skills in blogging and love sharing insig…

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